बिलासपुर, 5 सितंबर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई होगी। याचिका में दावा किया गया है कि 90 सदस्यीय विधानसभा में मंत्रिपरिषद की संख्या संविधान में निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।
याचिका कांग्रेस और सामाजिक कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 164(1A) का हवाला देते हुए मंत्रिपरिषद के आकार पर सवाल उठाया है। उनका तर्क है कि राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
90 सदस्यीय विधानसभा में अधिकतम 13 मंत्री
छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के अनुसार किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
इसी संवैधानिक प्रावधान को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ताओं ने मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती दी है। उनका कहना है कि 90 सदस्यों वाली विधानसभा के मामले में निर्धारित संवैधानिक सीमा का पालन किया जाना चाहिए।
मंत्रियों की संख्या बढ़कर 14 होने के बाद इस नियुक्ति की संवैधानिक वैधता को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचा।
मामला पहले सुप्रीम कोर्ट में भी था
इस विवाद से जुड़ा मामला पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी लंबित था। उस समय हाईकोर्ट में कार्यवाही रोक दी गई थी, क्योंकि राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि इसी मुद्दे से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
2 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से यही स्थिति बताई गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति स्पष्ट होने तक अपनी कार्यवाही रोक दी थी।
बाद में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई। 18 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने यह मानते हुए मामले का निपटारा कर दिया कि चुनाव संपन्न हो चुके हैं और याचिका का मूल उद्देश्य समाप्त हो गया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित याचिका पर आगे की सुनवाई का रास्ता साफ हुआ।
1 सितंबर को हुई सुनवाई
मामले में 1 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी और अधिवक्ता अभ्युदय सिंह उपस्थित हुए। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और शशांक ठाकुर ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने राज्य को जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। अब मामले की अगली कार्यवाही में राज्य सरकार का पक्ष सामने आने के बाद याचिकाकर्ता की आपत्तियों और संवैधानिक प्रावधानों पर विस्तार से सुनवाई होगी।
अभी नियुक्ति को वैध या अवैध नहीं माना गया
इस मामले में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट ने अभी तक 14वें मंत्री की नियुक्ति को न तो असंवैधानिक घोषित किया है और न ही उसे वैध ठहराया है। फिलहाल मामला विचाराधीन है और अदालत राज्य सरकार का जवाब मिलने के बाद आगे की सुनवाई करेगी।
याचिका में मुख्यमंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग और मंत्रिपरिषद के सभी 14 मंत्रियों को पक्षकार बनाया गया है।
अब संवैधानिक सीमा पर होगी बहस
मामले की अगली सुनवाई में मुख्य सवाल यह रहेगा कि 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए मंत्रिपरिषद की अधिकतम संवैधानिक सीमा किस तरह लागू होती है और वर्तमान में 14 मंत्रियों की नियुक्ति उस सीमा के अनुरूप है या नहीं।
अदालत के सामने यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट में पहले हुई कार्यवाही के बाद इस याचिका की वर्तमान स्थिति क्या है और विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद उठाए गए संवैधानिक सवाल पर हाईकोर्ट किस सीमा तक विचार कर सकता है।
फिलहाल राज्य सरकार के जवाब का इंतजार है। इसके बाद हाईकोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा और 14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर उठाए गए संवैधानिक सवालों पर निर्णय की दिशा स्पष्ट होगी।














