रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने गुरुवार को राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक (एसपी) आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। दशहरे (विजयादशमी) के अवसर पर 20 अक्टूबर को पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा के दौरान साड़ी पहने एके-47 से हवा में कई राउंड फायरिंग करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह कार्रवाई हुई है। पुलिस मुख्यालय ने इसे हथियार हैंडलिंग नियमों के विपरीत और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी बताया है।

वीडियो में अंकिता शर्मा को नीली साड़ी में एके-47 राइफल लोड करते और आसमान की ओर ताबड़तोड़ फायरिंग करते देखा जा सकता है। उनके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर भी एके-47 से फायरिंग करते नजर आए। इस घटना ने सुरक्षा, अनुशासन और शस्त्र हैंडलिंग प्रोटोकॉल पर बहस छेड़ दी है। कई पूर्व सेना अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने इसकी आलोचना की है।

घटना की पृष्ठभूमि

20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन राजनांदगांव पुलिस लाइन में पारंपरिक शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ। इसमें पुलिस के हथियारों और वाहनों की विधि-विधान से पूजा की गई। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में दशहरे पर शस्त्र पूजा की पुरानी परंपरा है। पूजा के बाद अक्सर ‘आवाजी कारतूस’ (ब्लैंक राउंड) से हर्ष फायरिंग की जाती है। इसी परंपरा के तहत कई जिलों रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर से भी फायरिंग के वीडियो सामने आए।

अंकिता शर्मा 2018 बैच की छत्तीसगढ़ कैडर आईपीएस अधिकारी हैं। उनको कई लोग ‘लेडी सिंघम’ भी कहते हैं। दुर्ग जिले से आने वाली शर्मा ने 2017 की यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 203 हासिल कर आईपीएस में प्रवेश किया। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित कई चुनौतीपूर्ण पोस्टिंग में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

नियमों और सुरक्षा मानकों का हवाला

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई हथियार हैंडलिंग नियमों के अनुरूप नहीं थी। राजनांदगांव रेंज के आईजी अजय यादव ने बताया कि मुख्यालय ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो पर नकारात्मक प्रतिक्रियाएं पुलिस बल की गरिमा को नुकसान पहुंचा रही हैं। एसपी का जवाब मिलने के बाद टिप्पणी दर्ज कर मामला मुख्यालय भेजा जाएगा।

पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके विज ने कहा कि परंपरा मुख्य रूप से शस्त्रों की पूजा की है, फायरिंग की नहीं। फायरिंग सुरक्षित स्थान और पर्याप्त सावधानियों के साथ ही होनी चाहिए। एक अनाम आईपीएस अधिकारी ने बताया कि राज्य में शस्त्र पूजा के दौरान आमतौर पर ‘आवाजी कारतूस’ (ब्लैंक राउंड) का इस्तेमाल होता है, लाइव गोला-बारूद नहीं। फिर भी हवा में चली गोली वापस आकर किसी को चोट पहुंचा सकती है।

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर कमियां बताईं:

  • लोडेड हथियार का खतरनाक और गलत हैंडलिंग
  • हथियार सुरक्षा के सभी पहलुओं का उल्लंघन
  • लोडेड हथियार को हर दिशा में घुमाना (पीछे खड़े लोग डरे हुए नजर आए)
  • सेवा हथियार का अनधिकृत कार्य और अनधिकृत पोशाक में इस्तेमाल
  • अकादमियों में सिखाए गए बुनियादी हथियार हैंडलिंग ड्रिल का पालन न करना
  • ऐसी लापरवाही से खुद या दूसरों को चोट या मौत हो सकती है

उन्होंने इसे “जिम्मेदारी के बिना अधिकार का काला प्रदर्शन” बताया और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। अन्य पूर्व सेना अधिकारियों ने भी इसे लापरवाही और गैर-पेशेवर बताया।

कुछ उपयोगकर्ताओं ने शर्मा का बचाव करते हुए कहा कि वे प्रशिक्षित आईपीएस अधिकारी हैं और परंपरा का पालन कर रही थीं। कुछ ने साड़ी में फायरिंग को लेकर आलोचना को लिंग आधारित बताया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार मामले का संज्ञान लेगी।

आगे क्या?

पुलिस मुख्यालय ने अंकिता शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई मुख्यालय के निर्देशों के अनुसार होगी। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि पारंपरिक अनुष्ठानों में भी आधुनिक हथियार सुरक्षा मानकों और अनुशासन का पालन कितना जरूरी है।

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