बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर बिलासपुर पहुंचे। नागपुर से इंटरसिटी एक्सप्रेस के जरिए आए भागवत कड़ी सुरक्षा के बीच रेलवे स्टेशन से कोनी स्थित सरस्वती आवासीय विद्यालय पहुंचे। यहां संघ की बौद्धिक बैठकों और संगठनात्मक चर्चाओं का दौर चलेगा। शुक्रवार को होने वाली प्रांत कार्यकारिणी की बैठक में छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलाव पर चर्चा होने की खबर है।
प्रांत प्रमुख का पद खत्म करने पर हो सकता है विचार
संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में फिलहाल पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रांत प्रमुख का पद है। संगठन के कामकाज को विकेंद्रीकृत करने के उद्देश्य से प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। इस सिलसिले में प्रांत प्रमुख का पद समाप्त करने और नई जिम्मेदारियां तय करने की संभावना जताई जा रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रायपुर और बिलासपुर को केंद्र बनाकर अलग-अलग संगठनात्मक इकाइयां बनाई जा सकती हैं। फिलहाल छत्तीसगढ़ प्रांत में 11 विभाग हैं। संभावित पुनर्गठन में रायपुर के अंतर्गत छह और बिलासपुर के अंतर्गत पांच विभाग रखने की योजना बताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शुक्रवार को प्रांत कार्यकारिणी की बैठक
डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार, 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रांत के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों के साथ बैठक करेंगे। इसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ बिलासपुर के अंतर्गत आने वाली 11 संगठनात्मक इकाइयों से जुड़े प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
यह बैठक केवल संघ के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों के लिए निर्धारित है। भाजपा और संघ परिवार के अन्य संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की होगी समीक्षा
संघ की प्रांत और विभाग स्तर की बैठकों में शताब्दी वर्ष के दौरान प्रस्तावित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। विभिन्न प्रांतों, विभागों और विशेष परियोजनाओं के प्रमुख अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्ययोजना और संगठनात्मक गतिविधियों की दिशा तय की जाएगी।
कोनी स्थित विद्यालय में होने वाले बौद्धिक सत्र में संघ के पदाधिकारी और स्वयंसेवक शामिल होंगे। इसमें राष्ट्र और समाज से जुड़े मुद्दों पर डॉ. भागवत अपने विचार रखेंगे। इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकों का कार्यक्रम भी है।
40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को जोड़ने की तैयारी
देशभर में युवाओं की सक्रियता और विभिन्न युवा आंदोलनों के बीच संघ में 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों की भागीदारी बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा की संभावना है। इसके तहत युवाओं को संघ और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा सकता है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) से जुड़े युवा कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक गतिविधियों और प्रशिक्षण वर्गों के माध्यम से जोड़ने की योजना पर भी विचार किया जा सकता है। माना जा रहा है कि डॉ. भागवत इस विषय पर युवा कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन दे सकते हैं।














