सेवानिवृत्त न्यायाधीश रजनी दुबे करेंगी दोनों कंपनियों के बीच विवाद का निपटारा
बिलासपुर। 20.60 करोड़ रुपये से अधिक के व्यावसायिक भुगतान विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रजनी दुबे को एकल मध्यस्थ (सोल आर्बिट्रेटर) नियुक्त किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11(6) के तहत दायर याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुए एमओयू (समझौता ज्ञापन) में विवाद के समाधान के लिए मध्यस्थता का स्पष्ट प्रावधान है, इसलिए मामले का निपटारा इसी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
वर्षों पुराने कारोबारी संबंध से जुड़ा मामला
यह विवाद रायपुर की फर्म एम/एस जय जगदीश ट्रांसपोर्ट और विशाखापट्टनम स्थित एम/एस श्री रत्नागिरी ट्रांसपोर्ट के बीच का है। याचिकाकर्ता के अनुसार दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय से वाहन किराया, टायर खरीद और मरम्मत सहित विभिन्न व्यावसायिक लेन-देन होते रहे हैं।
वर्ष 2021 में हुए एमओयू में प्रतिवादी ने 6.39 करोड़ रुपये की देनदारी स्वीकार करते हुए दो वर्ष के भीतर भुगतान करने पर सहमति जताई थी। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया और जारी किए गए सभी चेक अनादृत (बाउंस) हो गए।
बकाया बढ़कर पहुंचा 20.60 करोड़ रुपये
याचिका के अनुसार बाद के कारोबारी लेन-देन को मिलाकर लेजर खाते में कुल बकाया राशि 20,60,54,527 रुपये हो गई। इसके बाद 6 अक्टूबर 2025 को मध्यस्थता की नोटिस भेजी गई, लेकिन प्रतिवादी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
अखबार में नोटिस प्रकाशित होने के बाद भी नहीं पहुंचे प्रतिवादी
हाईकोर्ट ने प्रतिवादी को नोटिस जारी किया था, लेकिन व्यक्तिगत रूप से तामील नहीं होने पर विशाखापट्टनम के दो प्रमुख समाचार पत्रों में उसका प्रकाशन कराया गया। इसके बावजूद न तो प्रतिवादी और न ही उनका अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुआ।
सुनवाई के दौरान अदालत ने एमओयू में मौजूद मध्यस्थता प्रावधान को वैध मानते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रजनी दुबे को एकल मध्यस्थ नियुक्त किया। साथ ही आदेश की प्रति उन्हें भेजने तथा उनके पारिश्रमिक का निर्धारण दोनों पक्षों की सहमति से करने के निर्देश दिए।














