रायपुर। तेलंगाना सरकार छत्तीसगढ़ से सम्मक्का सागर परियोजना (पहले थुपाकुलगुडेम बैराज) के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जल्द जारी करने की मांग कर रही है। इस संबंध में 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में तेलंगाना के जल संसाधन मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात की।
परियोजना क्या है?
सम्मक्का सागर परियोजना तेलंगाना के मुलुगु जिले में गोदावरी नदी पर बनी बैराज परियोजना है। इसकी भंडारण क्षमता करीब 6.94 टीएमसी है। इसका मुख्य मकसद श्रीराम सागर परियोजना के स्टेज-2 के 4.40 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचाई का स्थिर पानी देना और रामप्पा-पाखल लिंक कैनाल से अतिरिक्त 30 हजार एकड़ नई सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे तेलंगाना के कई जिलों में कृषि और पेयजल की स्थिति सुधरेगी।
छत्तीसगढ़ पर कितना प्रभाव पड़ेगा?
इस परियोजना के बैकवाटर का असर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले (खासकर भूपालपट्टनम तहसील) के कुछ हिस्सों पर पड़ सकता है। कोटूर, तारलागुडा, गंगाराम, कंबलपेटा और सीतांग्राम जैसे गांवों के आसपास की भूमि प्रभावित होने की आशंका है।
अध्ययनों के अनुसार सामान्य भंडारण पर प्रभाव सीमित (कुछ दर्जन हेक्टेयर) बताया गया है, जबकि ऊंची बाढ़ की स्थिति में अधिक क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। विस्तृत सर्वे अभी चल रहा है। तेलंगाना सरकार ने इस सर्वे के लिए छत्तीसगढ़ को करीब 9.88 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
तेलंगाना क्यों चाहता है जल्द एनओसी?
तेलंगाना का कहना है कि एनओसी के बिना केंद्रीय जल आयोग की अंतिम मंजूरी नहीं मिल पा रही। इससे परियोजना में पूरा पानी नहीं भरा जा सकता और सिंचाई के लाभ अधूरे रह जाते हैं। मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने साय से मुलाकात में आश्वासन दिया कि प्रभावित भूमि और मकानों का पूरा मुआवजा तेलंगाना सरकार देगी। जरूरत पड़ने पर अग्रिम राशि भी जमा करने को तैयार है।
छत्तीसगढ़ का रुख क्या है?
सितंबर 2025 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इन-प्रिंसिपल सहमति दे दी थी। लेकिन औपचारिक एनओसी अभी लंबित है। छत्तीसगढ़ सरकार सर्वे रिपोर्ट (आईआईटी रुड़की समेत) का इंतजार कर रही है। दिल्ली मुलाकात में सीएम साय ने मामले को सहानुभूतिपूर्वक देखने का आश्वासन दिया।
दोनों राज्य इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। सर्वे पूरा होने के बाद ही अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।













