34 रेक में LHB कोच तैनात, पुराने ICF कोचों को चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है बाहर 

बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) की ट्रेनों में पुराने ICF कोचों की जगह आधुनिक LHB (Linke Hofmann Busch) कोच लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 26 ट्रेनों के 34 रेक में LHB कोच संचालित हो रहे हैं। आधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना से तैयार इन कोचों को यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ बेहतर आराम और अधिक यात्री क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

LHB कोचों में आधुनिक डिजाइन और बेहतर स्थिरता के साथ उन्नत सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है। इससे सफर के दौरान झटके और कंपन अपेक्षाकृत कम महसूस होते हैं। मजबूत ढांचा और बेहतर स्थिरता इन कोचों को अधिक गति से संचालन के लिए भी उपयुक्त बनाती है।

इन ट्रेनों में LHB कोच की सुविधा

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की जिन ट्रेनों में LHB कोच लगाए गए हैं, उनमें बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर, बिलासपुर-बक्सर, बिलासपुर-एर्नाकुलम, बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे, रायपुर-कोरबा, बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, दुर्ग-निजामुद्दीन संपर्क क्रांति, दुर्ग-जम्मू तवी, दुर्ग-नौतनवा, दुर्ग-कानपुर, दुर्ग-अजमेर, दुर्ग-उधमपुर, दुर्ग-निजामुद्दीन हमसफर और दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस शामिल हैं।

इसके अलावा रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी, कोरबा-इतवारी शिवनाथ एक्सप्रेस, बिलासपुर-नागपुर इंटरसिटी, बिलासपुर-रीवा, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-येलहंका, दुर्ग-अंबिकापुर और अंबिकापुर-शहडोल ट्रेनों में भी LHB कोच संचालित किए जा रहे हैं।

स्लीपर में 8 और AC-3 में 8 बर्थ ज्यादा

LHB कोचों का एक बड़ा फायदा उनकी अधिक यात्री क्षमता है। सामान्य ICF स्लीपर कोच में 72 बर्थ की तुलना में LHB स्लीपर कोच में 80 बर्थ होती हैं। इसी तरह ICF AC-3 कोच की 64 बर्थ के मुकाबले LHB AC-3 में 72 बर्थ उपलब्ध रहती हैं।

AC-2 कोच में भी अंतर उल्लेखनीय है। ICF AC-2 में जहां 46 बर्थ होती हैं, वहीं LHB AC-2 में 62 बर्थ होती हैं। अधिक बर्थ उपलब्ध होने से ज्यादा यात्रियों को आरक्षित सीट मिलने की संभावना बढ़ती है।

1999 में भारतीय रेल में शामिल हुए थे LHB कोच

LHB कोच का नाम जर्मनी की कंपनी Linke Hofmann Busch के नाम पर पड़ा है। भारतीय रेलवे में इन कोचों की शुरुआत वर्ष 1999 में हुई थी। वर्तमान में इनका निर्माण कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में किया जाता है।

आधुनिक डिजाइन, मजबूत ढांचा, बेहतर सस्पेंशन, अधिक क्षमता और आरामदायक यात्रा जैसी विशेषताओं के कारण भारतीय रेलवे में LHB कोचों का इस्तेमाल लगातार बढ़ाया जा रहा है।

यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में आधुनिक तकनीक और सुविधाओं को लगातार अपनाया जा रहा है। LHB कोच इसी प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनसे यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और बेहतर रेल यात्रा उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल रही है।

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