जांजगीर-चांपा। जिले के कोसमंदा गांव की बेटी मुस्कान प्रधान ने अपने साहसिक फैसले से पूरे क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर दी है। शादी के मंडप तक पहुंची बारात उस समय वापस लौट गई, जब दूल्हा नशे की हालत में पाया गया और मुस्कान ने बिना किसी दबाव के विवाह करने से साफ इनकार कर दिया। उनके इस निर्णय को महिला सम्मान, आत्मगौरव और नशे के खिलाफ मजबूत सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मुस्कान प्रधान का विवाह खोकहरा निवासी संत कुमार के साथ तय हुआ था। विवाह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और बारात भी गांव पहुंच चुकी थी। इसी दौरान यह बात सामने आई कि दूल्हा भारी नशे में है। स्थिति को समझते हुए मुस्कान ने तुरंत विवाह से इंकार कर दिया। उनके इस फैसले के बाद बारात को बिना विवाह के वापस लौटना पड़ा।
घटना की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन ने मुस्कान के साहस की खुले दिल से सराहना की। कलेक्टर जनमेजय महोबे और पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय ने उन्हें सम्मानित करते हुए कहा कि समाज में ऐसे उदाहरण युवाओं को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं। अधिकारियों ने इसे महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक जागरूकता की दिशा में प्रेरणादायक कदम बताया।
नशामुक्ति अभियान की बनीं नई पहचान
पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय ने मुस्कान को जिले के नशामुक्ति जनजागरूकता अभियान से जोड़ते हुए उन्हें काउंसलर की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक दबाव से ऊपर उठकर लिया गया उनका निर्णय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसी कारण उन्हें जिले का “यूथ आइकन” भी घोषित किया गया है, ताकि वे युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर सकें।
शिक्षा और कौशल विकास में मिलेगा सहयोग
कलेक्टर जनमेजय महोबे ने मुस्कान को आगे की पढ़ाई और कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि बेटियों के आत्मसम्मान, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना प्रशासन की प्राथमिकता है।
समाज से मिला व्यापक समर्थन
मुस्कान के फैसले को महिला संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और गांव के लोगों का खुला समर्थन मिला है। लोगों का कहना है कि विवाह विश्वास, जिम्मेदारी और सम्मान का रिश्ता है। ऐसे पवित्र अवसर पर नशे की हालत में पहुंचना न केवल अनुचित है, बल्कि रिश्ते की गरिमा के भी विपरीत है।
मुस्कान ने अपने निर्णय से यह स्पष्ट संदेश दिया कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में महिला की सहमति, सम्मान और आत्मगौरव सर्वोपरि हैं। कोसमंदा की यह बेटी आज केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्त समाज की एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरी है।














