बाघों की आपसी लड़ाई में हुई थी एक की मौत, वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल 

बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिज़र्व (ATR) में बाघों के बीच हुए आपसी संघर्ष में एक युवा बाघ की मौत का मामला सामने आया है। सोमवार को मौके पर तीन डॉक्टरों की टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया, जिसमें बाघ की गर्दन की हड्डी टूटी पाई गई। गर्दन के नीचे बाघ के दांतों के निशान और शरीर के कई हिस्सों, विशेषकर पैर के ऊपरी भाग में गहरे घाव मिले हैं।

कैमरा ट्रैप से खुला राज

फिलहाल अचानकमार टाइगर रिज़र्व में बाघों की गणना चल रही है। इसके लिए हर बीट में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इन्हीं कैमरों में से एक का डाटा निकाले जाने पर दो बाघों के बीच संघर्ष की तस्वीरें सामने आईं, जिनमें दोनों घायल नजर आ रहे थे। फोटो के आधार पर खोज अभियान शुरू किया गया और रविवार को सरसडोल बीट के कुडेरापानी, कक्ष क्रमांक 120 में एक बाघ का शव मिला।

अंधेरे के कारण टला पोस्टमार्टम

करीब एक सप्ताह पुराना शव मिलने से रिज़र्व में हड़कंप मच गया। अधिकारी और कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन अंधेरा हो जाने के कारण उसी दिन पोस्टमार्टम नहीं हो सका। सोमवार सुबह कानन पेंडारी चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन, मुंगेली के उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. आर.एम. त्रिपाठी और एक अन्य विशेषज्ञ ने घटनास्थल पर ही पोस्टमार्टम किया।

संघर्ष के स्पष्ट संकेत

जांच के दौरान आसपास के क्षेत्र में टूटे पेड़-पौधे, बाघ की बीट, खरोंच के निशान और मृत बाघ के पंजों में फंसे दूसरे बाघ के बाल मिले। इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो गया कि बाघ की मौत किसी बीमारी या शिकार से नहीं, बल्कि दूसरे बाघ के साथ हुई हिंसक लड़ाई में हुई है।

सुरक्षा दावों पर सवाल

घटना के बाद ATR प्रबंधन द्वारा किए जा रहे कड़े सुरक्षा दावों की पोल खुल गई है। हैरानी की बात यह है कि मृत बाघ का शव पर्यटन मार्ग से मात्र 50 मीटर की दूरी पर पड़ा रहा, लेकिन किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी। इससे टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स और फील्ड स्टाफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

PCCF वाइल्डलाइफ ने संभाला मोर्चा

घटना की गंभीरता को देखते हुए PCCF वाइल्डलाइफ अरुण पांडे सोमवार रात अचानकमार पहुंचे। मंगलवार सुबह उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों की बैठक लेकर नाराजगी जाहिर की। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश दिए।

AKT-17 बाघिन का शावक था मृत बाघ

जांच में सामने आया कि मृत बाघ, बाघिन AKT-17 का लगभग दो वर्षीय शावक था। कुछ दिन पहले ही वह अपनी मां से अलग होकर स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहा था। इस मौत के बाद अचानकमार टाइगर रिज़र्व में बाघों की संख्या घटकर 17 रह गई है।

AKT-22 और AKT-09 के बीच संघर्ष

प्रबंधन के अनुसार संघर्ष में शामिल बाघों की पहचान AKT-22 और SKT-09 के रूप में हुई है। आशंका है कि AKT-09 के हमले से शावक की मौत हुई। फिलहाल दोनों बाघ कैमरा ट्रैप में नजर नहीं आए हैं। उनकी तलाश जारी है। रिज़र्व प्रबंधन को चिंता है कि यदि कोई बाघ गंभीर रूप से घायल हुआ है, तो उसके उपचार के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन करना पड़ सकता है।

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