ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले श्रमिकों को बनाया निशाना, सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर शुरू किया सर्च ऑपरेशन

नई दिल्ली/बिलासपुर। जम्मू-कश्मीर में गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार शाम कुलगाम जिले में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे दो मजदूरों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। गंभीर रूप से घायल दोनों श्रमिकों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा  ने इस टारगेटेड हमले की जिम्मेदारी ली है।

अधिकारियों के अनुसार, यह हमला कुलगाम जिले के केल्लम गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर हुआ। शाम के समय आतंकियों ने वहां काम कर रहे मजदूरों पर गोलियां चला दीं। हमले में छत्तीसगढ़ निवासी दीपक और भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुलगाम के केलम इलाके में स्थित एक ईंट भट्टे पर शुक्रवार शाम को आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाया। इस अचानक हुए हमले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रहने वाले दो युवा मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक मजदूर, दीपक रात्रे (उम्र लगभग 24-26 वर्ष), पिता उमाशंकर रात्रे की अस्पताल ले जाने से पहले मौके पर ही मौत हो गई।

वहीं दूसरे मजदूर, भूपेंद्र (उम्र लगभग 28 वर्ष), पिता दशरथ को गंभीर हालत में तुरंत पास के अस्पताल से पहले जीएमसी अनंतनाग और फिर बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया था। लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों और सर्जरी के दौरान भूपेंद्र ने भी दम तोड़ दिया। दोनों मृतक मजदूर बिलासपुर जिले के निवासी थे और रोजी-रोटी कमाने के लिए कश्मीर के ईंट भट्टे में मजदूरी करने गए हुए थे। हालांकि कुछ खबरों में भूपेंद्र को उत्तरप्रदेश का मजदूर बताया गया है। पर दीपक के बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के होने की जानकारी मिली है। अधिकारिक रूप से दोनों के निवास स्थान के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। छत्तीसगढ़ के एडीजी (इंटेलिजेंस) अमित कुमार ने छत्तीसगढ़ के इन दोनों मजदूरों की आतंकी हमले में मौत होने की आधिकारिक पुष्टि की है।

घटना के तुरंत बाद दोनों को बेहतर इलाज के लिए अनंतनाग स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण दोनों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

हमलावरों की तलाश में बड़े स्तर पर अभियान

घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अभियान की निगरानी संभाल ली है। हमलावरों की तलाश जारी है और पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।

हाल के दिनों में बढ़ी आतंकी गतिविधियां

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर सशस्त्र पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की भी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है। वर्ष 2024 में भी श्रीनगर के शहीदगंज क्षेत्र में पंजाब के दो मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इससे पहले भी कई मौकों पर बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों पर हमले हो चुके हैं।

उपराज्यपाल ने की कड़ी निंदा

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि कुलगाम में हुए इस कायराना आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के एक श्रमिक की जान जाना अत्यंत दुखद है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत कर आतंकियों के खिलाफ अभियान और तेज करने के निर्देश दिए हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा बलों को आतंकियों का सफाया करने और हमले के जिम्मेदार लोगों को जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र में संयुक्त अभियान चला रही हैं।

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