खुद को पत्नी बताने वाली महिला निकली मकान मालकिन, स्कूल रिकॉर्ड से खुली सच्चाई

बिलासपुर। श्रम न्यायालय ने एक चर्चित मुआवजा प्रकरण में 12 लाख रुपये से अधिक के दावे को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिका भ्रामक तथ्यों पर आधारित थी और मृतक के साथ संबंध को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था।

मामले में गंगा बाई नामक महिला ने दावा किया था कि निर्माण कार्य के दौरान दुर्घटना में मारे गए रामेश्वर केंवट उसके पति थे। उसने भवन स्वामी और ठेकेदार से मुआवजे की मांग की थी।

हालांकि सुनवाई के दौरान सामने आए दस्तावेजों और जिरह ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। स्कूल अभिलेखों में बच्चों के पिता का नाम विजय राम साही दर्ज मिला, जिससे महिला के दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

अदालत में यह भी तथ्य सामने आया कि मृतक और गंगा बाई अलग-अलग जातियों से थे तथा उनके विवाह का कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं था। दूसरी ओर यह भी पता चला कि मृतक ने अपनी पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया था।

न्यायालय के निर्देश पर मृतक की वास्तविक पत्नी घरमिन बाई केंवट तथा उनके बच्चों को भी पक्षकार बनाया गया। उन्होंने अदालत को बताया कि मृतक केवल गंगा बाई के मकान में किराएदार के रूप में रहता था और दोनों के बीच वैवाहिक संबंध नहीं थे।

26 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में श्रम न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता दुर्घटना होने, दुर्घटना के दौरान मृतक के ड्यूटी पर होने अथवा लापरवाही साबित करने में असफल रही। न तो कोई प्रत्यक्षदर्शी प्रस्तुत किया गया और न ही एफआईआर तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विधिवत प्रमाणित किया जा सका।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल समाचार पत्रों की कतरनों या अनुमानों के आधार पर मुआवजा नहीं दिया जा सकता। चूंकि मूल दावा ही सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए वास्तविक पत्नी और बच्चों को भी इस याचिका के तहत कोई राहत नहीं दी जा सकती।

गौरतलब है कि गंगा बाई को प्रशासन की ओर से पहले ही एक लाख रुपये की अनुग्रह सहायता मिल चुकी थी

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