संघर्ष समिति ने कहा- उसलापुर-गनियारी व खैरागढ़-राजनांदगांव लूप जुड़ें, तभी आम यात्रियों को मिलेगा पूरा लाभ
बिलासपुर। कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी मिलने पर छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने खुशी जताते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू का आभार व्यक्त किया है। साथ ही समिति ने परियोजना में दो महत्वपूर्ण लूप लाइनें जोड़ने और रेल मार्ग के एलाइनमेंट में संशोधन करने की मांग भी उठाई है, ताकि यह परियोजना केवल माल परिवहन तक सीमित न रहकर आम यात्रियों के लिए भी उपयोगी बन सके।
समिति का कहना है कि प्रस्तावित रेल लाइन से कोयले का परिवहन महाराष्ट्र और गुजरात तक सुगमता से हो सकेगा, लेकिन बिलासपुर, मुंगेली, कवर्धा, खैरागढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई और रायपुर के बीच बड़ी संख्या में लोग नियमित यात्रा करते हैं। इसलिए उसलापुर से गनियारी तथा खैरागढ़ के आगे से राजनांदगांव तक लूप लाइन शामिल की जानी चाहिए, ताकि इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों का संचालन भी आसान हो सके।
2009 की साइकिल रैली से शुरू हुआ था आंदोलन
समिति ने बताया कि वर्ष 2009 में तत्कालीन छात्र युवा रेलवे जोन संघर्ष समिति ने बिलासपुर से मुंगेली, कवर्धा होते हुए डोंगरगढ़ तक रेल लाइन की मांग को लेकर नौ दिवसीय साइकिल रैली निकाली थी। इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला था।
इसके बाद संसद भवन में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी से दिलीप सिंह जूदेव, रमेश बैस, पुन्नूलाल मोहले और मधुसूदन यादव के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल के आग्रह पर इस रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे कराने के निर्देश दिए गए थे।
सर्वे से मंजूरी तक लगातार चलता रहा प्रयास
समिति के अनुसार, 2012 में हुए सर्वे के दौरान भी उसने सक्रिय भूमिका निभाई, ताकि परियोजना पर प्रतिकूल असर न पड़े। वर्ष 2018 में रेल लाइन को मंजूरी तो मिल गई, लेकिन बिलासपुर, लोरमी और पंडरिया जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मार्ग से बाहर कर कटघोरा-डोंगरगढ़ एलाइनमेंट तय कर दिया गया।
इस निर्णय के विरोध में पंडरिया क्षेत्र में लगभग दो वर्षों तक आंदोलन चला। बाद में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने पंडरिया-लोरमी क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए एलाइनमेंट बदलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिली और परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
समिति का कहना है कि वर्ष 2024 के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री बनने पर तोखन साहू ने इस परियोजना को फिर से प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ मिलकर उन्होंने रेल मंत्री को उत्तर-पश्चिम छत्तीसगढ़ के विकास के लिए इस रेल लाइन की आवश्यकता से अवगत कराया, जिसके बाद परियोजना को मंजूरी मिली।
एलाइनमेंट में बदलाव की भी मांग
संघर्ष समिति ने मांग की है कि अब, जब लगभग एक दशक बाद परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे होना है, तब रेल मार्ग का एलाइनमेंट इस तरह तय किया जाए कि तखतपुर, मुंगेली, लोरमी, कुंडा, पंडरिया, पंडातराई, पोंडी और कवर्धा जैसे प्रमुख नगरों और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अधिकतम लाभ मिल सके।
समिति का कहना है कि वर्ष 2018 के एलाइनमेंट के अनुसार लोरमी, पंडरिया, पंडातराई, पोंडी तथा कवर्धा जिले का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा रेल लाइन से 30 से 35 किलोमीटर दूर रह जाएगा। यदि अभी एलाइनमेंट में आवश्यक संशोधन किया जाए तो इन क्षेत्रों के लोगों को 15 किलोमीटर के दायरे में रेलवे स्टेशन या रेल सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
समिति ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले यही सबसे उपयुक्त समय है, जब जनहित को प्राथमिकता देते हुए रेल परियोजना का स्वरूप अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है।














