सफल अभ्यर्थियों को तत्काल ड्यूटी ज्वाइन करने का निर्देश
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा परीक्षाओं के आधार पर की गई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर भी रोक लगाई है।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अदालत के आदेश से उन अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी वर्षों की तैयारी और चयन प्रक्रिया के बाद सरकारी पदों पर नियुक्ति हुई थी। कोर्ट ने सफल अभ्यर्थियों को अपनी ड्यूटी फिर से संभालने का निर्देश भी दिया है।
परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद सरकार ने लिया था फैसला
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। सरकार के इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों का भविष्य भी अनिश्चित हो गया था, जो संबंधित परीक्षाओं में सफल होकर सरकारी सेवा में नियुक्त हो चुके थे।
सरकार ने हाल में 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जबकि कुछ अन्य परीक्षाओं को स्थगित कर पुराने भर्ती मामलों की जांच शुरू की गई है। इन फैसलों की पृष्ठभूमि में छात्रों का लंबे समय से चल रहा आंदोलन और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच प्रमुख कारण रहे।
करीब 450 अभ्यर्थियों को तत्काल राहत
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारी भर्ती से जुड़े करीब 450 अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर नियुक्त 54 अभ्यर्थी भी इस आदेश से प्रभावित होंगे।
वहीं, 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं से चयनित बड़ी संख्या में अधिकारी पहले ही सरकारी सेवा में योगदान दे चुके हैं। सरकार के रद्दीकरण आदेश के बाद उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर भी उठे सवाल
अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से नियुक्तियां रद्द किए जाने को चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान यह सवाल सामने आया कि यदि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता पाई भी जाती है, तो क्या बिना प्रभावित कर्मचारियों को पर्याप्त अवसर दिए उनकी नियुक्तियां सीधे रद्द की जा सकती हैं।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को महत्वपूर्ण माना और सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। मामले में अब राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
आंदोलन कर रहे छात्रों और चयनित अभ्यर्थियों के बीच टकराव
भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड में पिछले कई सप्ताह से छात्रों का आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में कथित धांधली और अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद हालांकि उन अभ्यर्थियों का विरोध शुरू हो गया, जो इन्हीं परीक्षाओं में सफल होकर सरकारी नौकरी पा चुके थे।
छात्र नेताओं ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार पर अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परीक्षा सुधार और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट की रोक फिलहाल अंतरिम राहत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार का परीक्षा रद्द करने का फैसला अंतिम रूप से खत्म हो गया है। अब सरकार को अदालत के समक्ष अपना जवाब दाखिल करना होगा और आगे की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि रद्दीकरण आदेश कानूनन टिकता है या नहीं।
इस फैसले से झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, चयनित अभ्यर्थियों के अधिकार और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करने की बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है।
इससे मिलती-जुलती ख़बरें-
डोंगरगढ़ पदयात्रा में निकली 12वीं टॉपर महिमा साहू की थार जीप ने ली जान, IAS बनने का सपना टूटा
सिविल जज प्रवेश परीक्षा निरस्त,पीएससी को दुबारा बिना फीस परीक्षा लेने का आदेश दिया हाईकोर्ट ने
पीएससी के मॉडल आंसर को लेकर सुनवाई, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं का हित सुरक्षित रखने का आदेश दिया
सफल परीक्षार्थी की आंसर शीट के पन्ने गायब, हाईकोर्ट ने सीजी पीएससी से मांगा जवाब
हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद पीएससी ने इंटरव्यू किया स्थगित, नए सिरे से जारी होगी चयन सूची
सीजी पीएससी टॉप लिस्ट में अफसरों, कांग्रेस नेताओं और बड़े कारोबारियों के बेटी-बेटे, दामाद!
साय केबिनेट का फैसला, सीबीआई जांच होगी पीएससी 2021 में भर्ती की
पीएसी के पीएससी के पूर्व अध्यक्ष सोनवानी, सचिव ध्रुव सहित कई के खिलाफ एसीबी ने दर्ज की एफआईआर














