मुख्य न्यायाधीश ने कहा- न्याय के प्रति भरोसा मजबूत करना हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभालने वाले न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र का हाईकोर्ट परिसर में गरिमापूर्ण समारोह में स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने उनका स्वागत करते हुए नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

स्वागत संबोधन में जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की समृद्ध न्यायिक परंपरा को आगे बढ़ाने में मुख्य न्यायाधीश का नेतृत्व महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश और न्यायिक परिवार मिलकर संस्था की गरिमा, कार्यकुशलता और प्रतिष्ठा को और मजबूत करने के लिए काम करेंगे।

महाधिवक्ता और बार एसोसिएशन की ओर से भी मुख्य न्यायाधीश का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने दोनों राज्यों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव को आपसी सद्भाव और सहयोग की मजबूत कड़ी बताया।

तीन दशक से अधिक का न्यायिक अनुभव

न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ। उन्होंने बीए और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। वे दिवंगत न्यायमूर्ति शरत चंद्र महापात्र के पुत्र हैं। उन्होंने 7 फरवरी 1988 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन कराया।

करीब 26 वर्षों तक उन्होंने सिविल, सर्विस, आपराधिक और संवैधानिक मामलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में वकालत की। उन्होंने गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट, हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, हिंदू एडॉप्शंस एंड मेंटेनेंस एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट से जुड़े मामलों में भी पैरवी की।

वे राज्य सरकार और ओडिशा लोक सेवा आयोग के अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता भी रहे। इसके अलावा विभिन्न संस्थानों की ओर से भी उन्होंने न्यायालय में पैरवी की।

17 अप्रैल 2015 को उन्होंने उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। एक दशक से अधिक के न्यायिक अनुभव के बाद 7 सितंबर 2026 को उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला।

बोले- यह सम्मान नहीं, बड़ी जिम्मेदारी है

अभिनंदन समारोह में मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र ने सभी के शुभकामना संदेशों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वागत के दौरान कही गई बातें उनके लिए केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और भरोसे का प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा करना उनके लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। उन्होंने ओडिशा से छत्तीसगढ़ आने का उल्लेख करते हुए दोनों राज्यों की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित किया।

मुख्य न्यायाधीश ने विश्वास जताया कि सभी के सहयोग और समर्पण से हाईकोर्ट न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा तथा संविधान के तहत न्याय प्रदान करने की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाएगा। उन्होंने कहा कि वादकारियों के विश्वास और अपेक्षाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

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