प्रभावित परिवारों को रोजगार और मुआवजा दिलाने पर भी चर्चा; हाथी मित्र दल को टॉर्च और टी-शर्ट देकर किया प्रोत्साहित
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर मरवाही वन परिक्षेत्र में हाथी संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान हाथियों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों की जानकारी तेजी से साझा करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप लॉन्च किया गया।
कार्यक्रम में कलेक्टर विजय दयाराम के., वनमंडलाधिकारी (DFO) कुमार निशांत, वन समिति अध्यक्ष राधा रैदास, जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और हाथी मित्र दल के सदस्य शामिल हुए।
जान गंवाने वाले परिवारों के प्रति जताई संवेदना
कार्यक्रम के दौरान पिछले वर्षों में हाथियों के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया गया।
अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों को रोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ने तथा पात्र मामलों में शासन के प्रावधानों के अनुसार मुआवजे का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की।
इंसान और हाथी दोनों की सुरक्षा प्राथमिकता
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन और वन विभाग के लिए मानव और हाथी दोनों की सुरक्षा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन, वन विभाग, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि गांव या आसपास हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही वन विभाग को सूचित करें। साथ ही हाथियों के पास जाने या उन्हें परेशान करने से बचें।
DFO कुमार निशांत ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी और गश्त की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और वन विभाग के साथ समन्वय बनाए रखने की अपील की।
ऐप से हाथियों की मिलेगी त्वरित जानकारी
‘गज संकेत’ ऐप के माध्यम से हाथियों की मौजूदगी और उनके आवागमन से जुड़ी जानकारी तेजी से एकत्र करने और साझा करने में मदद मिलेगी। इससे संवेदनशील इलाकों में समय रहते अलर्ट जारी करने और जरूरी कदम उठाने में सुविधा होगी।
कार्यक्रम में मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हाथी मित्र दल के सदस्यों को प्रोत्साहित किया गया। उन्हें टी-शर्ट और टॉर्च भी वितरित की गईं।
कार्यक्रम का उद्देश्य हाथियों और इंसानों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना, संघर्ष की घटनाओं में जनहानि रोकना और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना रहा।













