कृषि औजारों और पशुधन की पूजा, पौधरोपण के साथ आधुनिक खेती का प्रदर्शन; किसान को 16 लाख की हार्वेस्टर सब्सिडी

रायपुर। छत्तीसगढ़ का पारंपरिक हरेली पर्व बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में ग्रामीण संस्कृति, कृषि परंपराओं और लोक जीवन के रंगों के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कृषि औजारों, भगवान शिव और गौवंश की पूजा कर अच्छी बारिश, बेहतर फसल और किसानों की समृद्धि की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्री, जनप्रतिनिधि, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारंपरिक खेल, लोकगीत-संगीत, नृत्य और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों से ग्रामीण परिवेश तैयार किया गया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष पारंपरिक वेशभूषा में ‘पिंक ऑटो’ से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। ऑटो संगीता यादव चला रही थीं।

कृषि औजारों की पूजा, गौशाला में भी पहुंचे मुख्यमंत्री

कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश और नवग्रह पूजन से हुई। मुख्यमंत्री ने शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद नांगर, रापा, कुदाल और फावड़ा जैसे कृषि औजारों की पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर श्रद्धा अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली के समय खेती के कई महत्वपूर्ण काम पूरे हो चुके होते हैं। ऐसे में किसान प्रकृति, पशुधन और खेती में इस्तेमाल होने वाले औजारों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने इसे प्रकृति के साथ ग्रामीण समाज के पुराने संबंधों से जुड़ी परंपरा बताया।

मुख्यमंत्री निवास परिसर स्थित गौशाला में उन्होंने गाय और बछड़े की पूजा की तथा हरा चारा, चना, गुड़ और पारंपरिक ‘लौंदी’ खिलाई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण जीवन में पशुधन खेती और परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा पशुओं की देखभाल और संरक्षण की परंपराओं को आगे बढ़ाना जरूरी है।

पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पारिजात के पौधे लगाए। अन्य जनप्रतिनिधियों और विभिन्न निगम-मंडल के पदाधिकारियों ने भी अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से केवल संसाधन लेना ही नहीं, बल्कि उसका संरक्षण करना भी जरूरी है। पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि वे पेड़ बन सकें और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार हो।

किसान को 16 लाख की हार्वेस्टर सब्सिडी

कार्यक्रम में कृषि यांत्रिकीकरण और आधुनिक तकनीक पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्टॉल का निरीक्षण कर आधुनिक कृषि मशीनों की उपयोगिता और सुविधाओं की जानकारी ली।

इस दौरान रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर के लिए 16 लाख रुपये की सब्सिडी का चेक सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती में मशीनों के इस्तेमाल से लागत और श्रम कम करने के साथ उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है।

‘ड्रोन दीदी’ चंद्रकली से मुख्यमंत्री ने की बातचीत

कृषि विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने ‘ड्रोन दीदी’ चंद्रकली वर्मा से बातचीत की। चंद्रकली ने बताया कि वह खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए उन्हें प्रति एकड़ 300 रुपये की आय होती है।

उनके अनुसार अब तक वह 2,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं और पिछले दो वर्षों में करीब 7 लाख रुपये की आय अर्जित की है। मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को महिलाओं के लिए आय के नए अवसरों से जोड़ने की बात कही।

प्राकृतिक खेती के स्टॉल पर किसानों को अरहर और उड़द के मिनी किट भी वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने कृषि मित्रों द्वारा तैयार ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और मधुमक्खी के मोम से बने उत्पादों की जानकारी भी ली।

गेडी, बिल्लस और पारंपरिक खेलों ने खींचा ध्यान

मुख्यमंत्री निवास परिसर को नीम और आम की पत्तियों, गेंदे के फूलों और ग्रामीण सजावट से सजाया गया था। यहां गेडी, बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन ने लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक झूले ‘रहचुली’ पर भी लोगों ने रुचि दिखाई।

मांदर और ढोलक की धुन पर कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने भी कलाकारों के साथ लोकधुन पर नृत्य किया। कार्यक्रम में ठेठरी, खुरमी और बड़ा जैसे पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए थे।

रमन सिंह बोले-किसानों की खुशहाली से मजबूत होंगे गांव

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि, प्रकृति और लोक संस्कृति से जुड़ा प्रमुख पर्व है। कृषि औजारों, पशुधन और प्रकृति की पूजा इसके माध्यम से कृतज्ञता की भावना को दर्शाती है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि हरेली खेती, हरियाली और प्रकृति के प्रति सम्मान का पर्व है। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से राज्य और देश दोनों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ लोक कला, पारंपरिक ज्ञान, ग्रामीण खेल और छत्तीसगढ़ी खान-पान जैसी सांस्कृतिक परंपराओं को भी संरक्षित करना जरूरी है।

कार्यक्रम में  महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब भी शामिल हुए। इनके अलावा विधायक, विभिन्न निगम-मंडल और आयोगों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान, लोक कलाकार और बड़ी संख्या में नागरिक भी मौजूद रहे।

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