गुढ़ियारी के अवधपुरी मैदान में उमड़ा आस्था और उत्साह का सैलाब, गोविंदाओं ने दिखाया जोश
रायपुर। राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में शनिवार को भव्य दही हांडी उत्सव का आयोजन हुआ। भगवान श्रीकृष्ण की जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समारोह में पहुंचकर गोविंदा टीमों का उत्साह बढ़ाया और प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दही हांडी केवल मनोरंजन और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि एकता, सहयोग, विश्वास और टीम भावना की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हांडी तक पहुंचने वाला गोविंदा अकेले ऊंचाई हासिल नहीं करता। उसके नीचे खड़े साथियों का विश्वास, सहयोग और सामूहिक ताकत ही उसे लक्ष्य तक पहुंचाती है। यही भावना जीवन और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण है।
कृष्ण के जीवन से कर्तव्य और कर्मयोग की सीख
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन मानव को बेहतर ढंग से जीवन जीने और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। ग्वाल-बालों के प्रिय सखा के रूप में उन्होंने प्रेम और मित्रता का संदेश दिया, द्वारका के नेतृत्वकर्ता के रूप में कुशल नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत किया और कुरुक्षेत्र में सारथी बनकर मानवता को कर्मयोग का मार्ग दिखाया।
राम की धरती छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भगवान श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि है। वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने छत्तीसगढ़ की धरती पर लंबा समय बिताया। रामायण काल का दंडकारण्य क्षेत्र आज के अबूझमाड़ से भी जुड़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंग और धार्मिक स्थल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विशिष्ट बनाते हैं। राज्य सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थस्थलों से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।
शिव और शक्ति उपासना की समृद्ध परंपरा
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को देवी-देवताओं की कृपा से समृद्ध भूमि बताते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ की भी इस प्रदेश पर विशेष कृपा रही है। कबीरधाम का प्राचीन भोरमदेव मंदिर और राजिम का कुलेश्वर महादेव जैसे प्रमुख शिवधाम आस्था के बड़े केंद्र हैं।
उन्होंने जशपुर की मधेश्वर पहाड़ी का उल्लेख करते हुए इसे अपनी विशिष्ट प्राकृतिक संरचना के कारण विशेष पहचान वाला स्थल बताया और कहा कि यहां स्थित प्राकृतिक शिवलिंग को विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मां बम्लेश्वरी, डोंगरगढ़, मां महामाया रतनपुर, मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा और मां चंद्रहासिनी चंद्रपुर जैसे प्रमुख शक्तिस्थल भी प्रदेश की समृद्ध धार्मिक परंपरा को दर्शाते हैं। सरकार इस विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भजनों और संगीत ने बांधा समां
दही हांडी उत्सव के दौरान पूरे अवधपुरी मैदान में भक्ति, उल्लास और उत्साह का माहौल रहा। गोविंदा टीमों ने प्रतियोगिता में पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा और लोकप्रिय गायक बी प्राक की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को खूब आकर्षित किया। भजनों और भक्तिमय गीतों के बीच पूरा आयोजन कृष्ण भक्ति में डूबा नजर आया।
कार्यक्रम में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा और ईश्वर साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, रायपुर नगर निगम की सभापति मीनल चौबे, वीणा सिंह, कौशल्या देवी साय सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद रहे।














