छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 100% महिला आरक्षण पहले ही कर चुका है निरस्त, तीन साल बाद भी नहीं निकला संशोधित भर्ती विज्ञापन
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों में पुरुष अभ्यर्थियों की भर्ती नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा पूर्व आदेश का पालन नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) के सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस जारी किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तीन वर्ष पहले 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर निरस्त किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन नहीं किए गए और न ही पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल करते हुए नया भर्ती विज्ञापन जारी किया गया।
2021 में दी गई थी हाईकोर्ट में चुनौती
यह मामला वर्ष 2021 में दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर सीधी भर्ती के लिए जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। उस विज्ञापन में केवल महिला अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए पात्र माना गया था।
याचिकाकर्ता अभय कुमार किस्पोट्टा, डॉ. अजय त्रिपाठी, एलुस एक्का और आदित्य सिंह ने दलील दी थी कि जब बी.एससी. नर्सिंग और एम.एससी. नर्सिंग पाठ्यक्रमों में पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रवेश दिया जाता है, तो भर्ती प्रक्रिया में केवल महिलाओं को पात्र मानना पुरुष अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव है।
सरकार ने दिया था यह तर्क
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पक्ष रखा था कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और नर्सिंग से जुड़े अधिकांश कार्य महिलाओं द्वारा किए जाते हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को संविधान के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया था।
नियम नहीं बदले, संविदा भर्ती का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अदालत के फैसले के तीन वर्ष बाद भी स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। इतना ही नहीं, नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय 22 जून 2026 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने संविदा भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कदम हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत है और नियमित भर्ती से बचने का प्रयास है।
पांच सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और पीएससी सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद निर्धारित की है।














