POCSO और यौन शोषण से जुड़े मामले में हस्तक्षेप से इनकार, गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा फिलहाल जारी

नई दिल्ली, 31 मई। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को बरकरार रखते हुए उसके खिलाफ दायर चुनौती याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद को गिरफ्तारी से मिली कानूनी सुरक्षा फिलहाल जारी रहेगी।

मामला उत्तर प्रदेश में दर्ज एक POCSO और कथित यौन शोषण प्रकरण से जुड़ा है। आरोपों के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में कुछ शर्तों के साथ उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की थी। (

इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को बरकरार रखा। अदालत के इस फैसले के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।

यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई। मामले में कुछ बटुकों के बयान दर्ज किए गए थे तथा मेडिकल परीक्षण सहित अन्य साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई भी हुई थी। आरोपों को लेकर व्यापक बहस छिड़ी थी और अदालतों में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।

सुनवाई के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दावा किया गया था कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है और उन्हें न्यायिक संरक्षण की आवश्यकता है। वहीं जांच एजेंसियां मामले में साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कहती रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्धारित कानूनी मार्ग से जारी रहेगी। अदालत ने फिलहाल केवल अग्रिम जमानत से संबंधित राहत को बरकरार रखा है, जबकि मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

 

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