बिलासपुर। रेंज साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए खपाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ देश के 11 राज्यों में 50 साइबर अपराध की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों में करीब 4 करोड़ रुपये की ठगी की रकम का लेनदेन पाया गया है।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में अजय कुमार सोनी (36), अभिलाष कुमार डेनियल उर्फ चिंटू (49), भास्कर कश्यप (42), नरेंद्र कुर्रे (35), आशीष तिवारी (36) और देवेश कुमार दास उर्फ रॉबिन (26) शामिल हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और बैंक खातों की भी जांच कर रही है।

25 दिन में खाते से हुआ 2.20 करोड़ का लेनदेन

मामले की शुरुआत बिलासपुर के मंगला स्थित छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा में एक खाते में हुए संदिग्ध लेनदेन से हुई। ‘अजय फार्म हाउस’ नाम से संचालित खाते में 18 मई से 12 जून के बीच महज 25 दिनों में करीब 2.20 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ।

इसी दौरान 1,68,443 रुपये का एक संदिग्ध ट्रांजैक्शन भी सामने आया। बैंक स्टेटमेंट, खाता खोलने से संबंधित दस्तावेज, मोबाइल नंबर और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद पुलिस को खाते के साइबर अपराध में इस्तेमाल होने के संकेत मिले।

इसके बाद पुलिस ने बैंकिंग लेनदेन की कड़ियों और आरोपियों के आपसी संपर्कों को जोड़ते हुए पूरे नेटवर्क की पड़ताल की और छह आरोपियों तक पहुंची।

एक खाते पर 21, दूसरे पर 24 शिकायतें

जांच में सामने आया कि अजय कुमार सोनी के बैंक खाते के खिलाफ 21 साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं। इनमें चंडीगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान और झारखंड समेत कई राज्यों के मामले शामिल हैं।

इसी तरह भास्कर कश्यप के खाते से जुड़े 24 मामले सामने आए। नरेंद्र कुर्रे के खाते के खिलाफ दो और आशीष तिवारी के खाते से जुड़े तीन मामले भी जांच में सामने आए। इस तरह आरोपियों से जुड़े खातों के खिलाफ कुल 50 शिकायतों का पता चला है।

खाता खोलो और कमीशन लो, फिर सौंप दो बैंकिंग साधन

पुलिस की जांच के अनुसार गिरोह लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाता था। खाता खुलने के बाद संबंधित मोबाइल नंबर, ATM कार्ड और अन्य बैंकिंग साधन दूसरे लोगों को सौंप दिए जाते थे।

इन खातों में साइबर ठगी से हासिल रकम मंगाई जाती और फिर उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। गिरोह में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कोई नए खाताधारक तलाशता था, कोई खाता खुलवाने की व्यवस्था करता था, जबकि कुछ लोग खातों को ऑनलाइन लेनदेन के लिए तैयार करते थे और जरूरी एप डाउनलोड करवाते थे।

लेनदेन के आधार पर खाताधारकों को कमीशन दिया जाता था।

मोबाइल, सिम और बैंकिंग दस्तावेज जब्त

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, PAN कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, ATM कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं।

तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही उन सभी बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया।

पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम तथा साइबर ठगी के मामलों का खुलासा हो सकता है।

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