सुप्रीम कोर्ट का नियमों में संशोधन के आदेश
बिलासपुर। जिला न्यायपालिका के अधिकारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अदालत के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ समेत सात राज्यों में जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जाएगी। इस निर्णय का लाभ छत्तीसगढ़ में 125 से अधिक न्यायिक अधिकारियों को मिलने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की सरकारों को अपने सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। राज्यों को यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने और आदर्श रूप से दो महीने के भीतर नियमों में बदलाव करने को कहा गया है।
60 साल की उम्र पर होगा प्रदर्शन का आकलन
हालांकि दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा सभी न्यायिक अधिकारियों को स्वतः नहीं मिलेगी। किसी अधिकारी के 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर हाईकोर्ट उसके दक्षता, कार्यक्षमता और सेवा प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगा। इसी आकलन के आधार पर यह तय होगा कि अधिकारी को 62 वर्ष तक सेवा में बनाए रखा जाए या नहीं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग करने के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था में दक्षता बनाए रखना है।
छत्तीसगढ़ में 125 से अधिक अधिकारियों को लाभ
छत्तीसगढ़ में उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारी प्रदेश के सभी 33 जिलों में पदस्थ हैं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार 33 राजस्व जिलों में से 23 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश पदस्थ हैं, जबकि शेष जिलों में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कार्यरत हैं।
प्रदेश में करीब 23 जिला न्यायाधीश और 110 अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हैं। नियमों में संशोधन और पात्रता के आकलन के बाद इन अधिकारियों को नई व्यवस्था का लाभ मिल सकता है।
31 मार्च 2026 के बाद सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी विकल्प
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में उन न्यायिक अधिकारियों को भी विकल्प दिया गया है, जो 31 मार्च 2026 या उसके बाद 60 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
ऐसे अधिकारी दोबारा न्यायिक सेवा में लौटने का विकल्प चुन सकते हैं, बशर्ते उन्होंने केंद्र या राज्य सरकार के किसी अन्य पद या लाभ के पद पर नियुक्ति स्वीकार न की हो।
वापसी पर उन्हें वेतन, वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता जैसे लाभ मिल सकते हैं। हालांकि उनकी पुनर्नियुक्ति भी हाईकोर्ट के मूल्यांकन और प्रदर्शन के आधार पर होगी। पहले प्राप्त सेवानिवृत्ति लाभों की राशि लौटानी होगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद न्यायिक अनुभव का लाभ मिलने के साथ लंबित मामलों के तेजी से निराकरण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।













