पिता के साथ दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाते थे पवन और नकुल, मुश्किल हालात के बावजूद नहीं छोड़ी पढ़ाई और तैयारी

धमतरी, छत्तीसगढ़। जिले के एक छोटे से गांव के दो सगे भाइयों ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों को पीछे छोड़कर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में चयन हासिल कर परिवार और पूरे गांव का नाम रोशन किया है। दुधवारा गांव के पवन नेताम और उनके छोटे भाई नकुल नेताम जब प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पहली बार CRPF की वर्दी में अपने गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। गांव में देशभक्ति के गीतों के बीच दोनों भाइयों को फूल-मालाओं से सम्मानित किया गया।

इसके बाद ग्रामीणों ने तिरंगा लहराते हुए मोटरसाइकिल रैली निकाली। गांव की गलियों से गुजरी इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और दोनों भाइयों का उत्साह बढ़ाया।

पिता के साथ करते थे मजदूरी

पवन और नकुल का बचपन और परिवार की परिस्थितियां आसान नहीं थीं। आर्थिक तंगी के कारण दोनों भाइयों को अपने पिता राजा राम नेताम के साथ दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती थी। वे निर्माण कार्य समेत दूसरे मजदूरी के काम कर परिवार की मदद करते थे। इसके बावजूद सेना और सुरक्षा बल में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना उन्होंने नहीं छोड़ा।

मजदूरी के बाद समय निकालकर दोनों ने पढ़ाई के साथ शारीरिक प्रशिक्षण जारी रखा। कठिन मेहनत और लगातार तैयारी का नतीजा यह रहा कि दोनों भाइयों ने CRPF में जगह बना ली।

दूसरे प्रयास में पवन, पहली कोशिश में नक्कुल सफल

पिता राजा राम नेताम ने कहा कि उन्हें अपने दोनों बेटों की मेहनत पर गर्व है। उन्होंने बताया कि पवन ने दूसरे प्रयास में केंद्रीय पुलिस बल में चयन हासिल किया, जबकि नक्कुल पहली ही कोशिश में सफल हो गए।

उन्होंने कहा कि जब दोनों बेटे पहली बार CRPF की वर्दी पहनकर घर पहुंचे तो परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनके लिए यह पल वर्षों की मेहनत और संघर्ष का फल मिलने जैसा था।

गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणा

दुधवारा के ग्रामीणों का कहना है कि दोनों भाइयों की सफलता गांव के युवाओं के लिए मिसाल है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने साबित किया कि मेहनत और लगन के दम पर कठिन परिस्थितियों को बदला जा सकता है।

ग्राम पंचायत के प्रमुख द्रोण गायकवाड़ ने कहा कि गांव के दो युवाओं के CRPF में चयन से पूरा समुदाय गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि जिन हाथों में कभी दूसरों के मकान बनाने के लिए मजदूरी के औजार होते थे, आज वही हाथ देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं।

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