सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 6 अगस्त की बैठक में लिया गया फैसला, कार्यभार संभालने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं

बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ओडिशा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कृष्ण राम महापात्र का तबादला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करने की सिफारिश की है। कॉलेजियम की यह अनुशंसा 6 अगस्त को हुई बैठक में की गई। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई है।

जस्टिस महापात्र उन दो हाईकोर्ट न्यायाधीशों में शामिल हैं, जिनके स्थानांतरण की सिफारिश कॉलेजियम ने की है। उनके अलावा गुवाहाटी हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस मनश रंजन पाठक को गुजरात हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है।

कॉलेजियम की सिफारिश के अनुसार, जस्टिस महापात्र के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट आने के बाद न्यायालय की न्यायिक व्यवस्था में एक और अनुभवी न्यायाधीश जुड़ेंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के बयान में स्थानांतरण के पीछे के कारणों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

इसी तरह, जस्टिस महापात्र छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कब तक कार्यभार संभालेंगे, इसकी तारीख भी फिलहाल स्पष्ट नहीं की गई है। स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित आदेश जारी होने के बाद ही उनके कार्यभार ग्रहण करने की स्थिति साफ होगी।

26 साल की वकालत का अनुभव, 2015 में बने हाईकोर्ट जज

जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने 7 फरवरी 1988 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन कराया था। उन्होंने करीब 26 वर्षों तक विभिन्न विधि क्षेत्रों में वकालत की। इनमें सिविल, सेवा, आपराधिक और संवैधानिक मामलों के साथ-साथ गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट, हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट तथा जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट से जुड़े मामले भी शामिल रहे।

उन्होंने ओडिशा सरकार और ओडिशा लोक सेवा आयोग के लिए अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा केओंझर की सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग, नई दिल्ली, नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत विभिन्न संस्थानों की ओर से भी कानूनी पैरवी की।

जस्टिस महापात्र को 17 अप्रैल 2015 को ओडिशा हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।

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