शासकीय सेवारत मां की कैंसर मौत के बाद नौकरी की मांग खारिज
बिलासपुर। मां की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग करने वाली 47 वर्षीय महिला को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि राज्य सरकार की 14 जून 2013 की नीति में अनुकंपा नियुक्ति के लिए अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष तय है। इस सीमा से अधिक उम्र होने के कारण महिला का आवेदन खारिज करने में अधिकारियों ने कोई गलती नहीं की।
मां की मौत के बाद किया था आवेदन
कोर्ट ने जगदलपुर निवासी शांति सेठिया की याचिका खारिज कर दी। शांति सेठिया की मां सरकारी काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सहायक स्तर के पद पर कार्यरत थीं। उनकी मौत कैंसर के कारण हुई थी। इसके बाद शांति ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने अधिकतम उम्र सीमा पार होने के आधार पर उसे खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि परिवार में कमाने वाला कोई दूसरा सदस्य नहीं है और वह मृत कर्मचारी की इकलौती बेटी है। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसके मामले में विशेष रियायत दी जानी चाहिए।
सरकार ने उम्र सीमा का दिया हवाला
महिला के वकील ने 22 नवंबर 2007 के एक सर्कुलर का हवाला देते हुए अधिकतम उम्र सीमा में छूट देने की मांग की। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 14 जून 2013 की नीति के क्लॉज 11 के तहत बेटी जैसे आवेदकों के लिए अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष है। शांति की उम्र इससे अधिक होने के कारण आवेदन नियमों के अनुसार खारिज किया गया।
विधवा के लिए छूट, बेटी के लिए नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि 22 नवंबर 2007 के सर्कुलर में मृत कर्मचारी की विधवा को अधिकतम उम्र सीमा से छूट देने का प्रावधान है। लेकिन याचिकाकर्ता मृत कर्मचारी की बेटी है, इसलिए वह इस छूट का लाभ नहीं ले सकती।
कोर्ट ने माना कि नीति में उम्र सीमा स्पष्ट है और आवेदन खारिज करने में कोई अवैधता नहीं हुई। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।













