परिजन शव लेकर IG ऑफिस पहुंचे, यौन शोषण और हत्या की आशंका व्यक्त की
अंबिकापुर। सूरजपुर जिले के भटगांव क्षेत्र में ठेकेदार के घर घरेलू काम करने वाली 16 वर्षीय आदिवासी किशोरी की मौत का मामला गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। परिजनों ने पुलिस की जांच पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए किशोरी की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया है। उन्होंने हत्या और यौन शोषण की आशंका जताते हुए दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी।
परिजनों की मांग और मामले को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद शुक्रवार को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किशोरी के शव का चार डॉक्टरों की टीम ने वीडियोग्राफी के साथ दूसरी बार पोस्टमार्टम किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान परिजनों को हुआ संदेह
मृत किशोरी बलरामपुर जिले के चांदो थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह करीब एक महीने पहले परिचित के माध्यम से घरेलू काम करने भटगांव क्षेत्र में एक ठेकेदार के घर गई थी। परिवार को उम्मीद थी कि उसकी कमाई से घर की आर्थिक स्थिति में कुछ मदद मिलेगी।
मंगलवार शाम परिजनों को फोन पर सूचना दी गई कि किशोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलने के बाद परिवार बुधवार को भटगांव पहुंचा। परिजनों के मुताबिक, उनके पहुंचने से पहले ही शव को अस्पताल ले जाया जा चुका था। उन्हें बताया गया कि किशोरी ने ठेकेदार के घर पर फांसी लगाई है।
बुधवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद ठेकेदार की ओर से परिजनों को 20 हजार रुपये दिए गए और शव को उसके गृहग्राम भेज दिया गया।
गांव में गुरुवार को अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान प्रारंभिक रस्मों के समय परिजनों ने किशोरी की गर्दन पर फांसी के सामान्य निशान नहीं होने की बात कही। उन्होंने शव के निजी अंगों में सूजन भी देखी। इसके बाद परिवार ने ग्रामीणों से चर्चा की और मामले पर संदेह गहरा गया।
शव लेकर आईजी कार्यालय पहुंचे परिजन
मामले की जानकारी मिलने पर सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि भी परिवार के साथ खड़े हुए। गुरुवार रात परिजन और ग्रामीण शव को पिकअप वाहन में लेकर अंबिकापुर स्थित पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय पहुंचे।
वहां उन्होंने सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। परिजनों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि किशोरी ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना की जानकारी स्थानीय ग्राम पंचायत के सरपंच को तत्काल नहीं दी गई। उनके अनुसार, घटना के करीब दो दिन बाद सरपंच को इसकी जानकारी मिली। परिवार ने डॉक्टर और थाना प्रभारी के समक्ष भी अपनी शंकाएं रखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
जांच प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया कि मर्ग और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। इसी वजह से उन्हें आशंका है कि मामले की जांच सही दिशा में नहीं हुई है।
किशोरी के शरीर की स्थिति को देखते हुए परिवार ने उसके साथ यौन शोषण के बाद हत्या किए जाने की आशंका भी व्यक्त की है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आईजी के निर्देश पर शव को गुरुवार रात मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सुरक्षित रखा गया और शुक्रवार को चार चिकित्सकों की टीम ने दोबारा पोस्टमार्टम किया। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
छह भाई-बहनों में थी किशोरी
मृत किशोरी छह भाई-बहनों वाले परिवार से थी। आर्थिक तंगी के कारण उसे कम उम्र में ही घरेलू काम के लिए दूसरे स्थान पर एक ठेकेदार के घर जाना पड़ा। परिवार को उम्मीद थी कि उसकी मजदूरी से घर के खर्च में कुछ राहत मिलेगी।
लेकिन उसकी मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। छोटे भाई-बहनों वाले इस आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने अब बेटी की मौत के साथ-साथ उसके साथ वास्तव में क्या हुआ, यह जानने की चिंता भी खड़ी हो गई है।
लापरवाही मिली तो पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा ने कहा कि परिजनों को मामले की जांच ठीक से नहीं होने का संदेह था और उन्होंने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की थी। उनकी मांग के अनुरूप डॉक्टरों की टीम ने दूसरी बार पोस्टमार्टम किया है।
आईजी ने कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।













