गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के 108 दैनिक वेतनभोगियों का मामला फिर अदालत में
बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में लंबे समय से कार्यरत 108 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन-भत्तों का मामला हाईकोर्ट में फिर उठा है। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. अश्विनी दीक्षित को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया था।
विश्वविद्यालय ने अपने जवाब में कहा कि कर्मचारियों को उपलब्ध सुविधाएं और लागू वेतनमान दिए जा रहे हैं। बकाया राशि के भुगतान के लिए यूजीसी और केंद्र सरकार से राशि मांगी गई है। फंड मिलते ही भुगतान करने की बात कही गई है।
धन्नू पांडेय के मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब
दिवंगत कर्मचारी धन्नू पांडेय से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने उनके वेतन और अन्य देय लाभों की विस्तृत जानकारी देने वाली रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय ने 15 लाख रुपये देने की पेशकश की, जबकि याचिकाकर्ता ने 18 वर्षों की पूरी सेवा अवधि का वेतन और भत्ते देने की मांग की।
पिछली सुनवाई में अदालत ने रजिस्ट्रार से शपथपत्र मांगा था। कोर्ट ने पहले दाखिल शपथपत्र पर असंतोष जताते हुए कहा था कि उसमें केवल सेवानिवृत्ति देयों का उल्लेख है, जबकि नियमित वेतन, पेंशन और अन्य लाभों की जानकारी भी अपेक्षित थी।
कर्मचारियों की ओर से यह भी आपत्ति जताई गई कि उन्हें अलग-अलग पदों पर काम करने के बावजूद चतुर्थ श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया गया और पूर्ण वेतन नहीं मिल रहा है।














