निर्धारित स्थल तक राख नहीं पहुंचाने पर पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्रवाई
कोरबा। फ्लाई ऐश के परिवहन में नियमों की अनदेखी करने पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने एनटीपीसी पर 1 लाख 20 हजार रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया है। जांच में पाया गया कि राख को निर्धारित मार्ग और स्थल तक पहुंचाने के बजाय बीच रास्ते में अन्य स्थानों पर उतार दिया गया था, जिससे प्रदूषण फैलने की आशंका बढ़ गई।
जानकारी के अनुसार एनटीपीसी ने अपने संयंत्र के साइलो से फ्लाई ऐश परिवहन का ठेका एक निजी कंपनी को दिया है। निरीक्षण के दौरान वाहन क्रमांक सीजी 12 एआर 7717 की जांच की गई। पाया गया कि वाहन ने निर्धारित गंतव्य तक राख पहुंचाने के बजाय गोढ़ी स्थित गुरु नानक इंडस्ट्रीज परिसर में फ्लाई ऐश डंप कर दी।
इसी प्रकार वाहन क्रमांक सीजी 12 बीडी 9733 ने भी संयंत्र से फ्लाई ऐश लेकर दादर-ढेलवाडीह स्थित एक फ्लाई ऐश ईंट निर्माण इकाई में सामग्री उतार दी। जबकि दोनों वाहनों को दुर्ग-रायपुर बायपास मार्ग से निर्धारित स्थल तक राख पहुंचानी थी।
पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें
स्थानीय स्तर पर पहले भी सड़क किनारे और अन्य स्थानों पर फ्लाई ऐश फेंके जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पर्यावरण संरक्षण मंडल का कहना है कि निर्धारित स्थल तक सामग्री नहीं पहुंचाने और परिवहन नियमों का पालन नहीं करने के कारण यह कार्रवाई की गई है।
मंडल ने एनटीपीसी परियोजना प्रमुख को निर्देश जारी कर कहा है कि फ्लाई ऐश का परिवहन पूरी तरह नियमों के अनुरूप कराया जाए। साथ ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से परिवहन की निगरानी सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
लागत बचाने के लिए होती है मनमानी
जानकारी के मुताबिक एनटीपीसी का धनरास में ऐश डैम मौजूद है, जहां फ्लाई ऐश पहुंचाई जानी चाहिए। लेकिन कई वाहन निर्धारित स्थल तक जाने के बजाय रास्ते में ही राख उतार देते हैं। इससे धूल और प्रदूषण की समस्या बढ़ती है।
क्षेत्रीय अधिकारी प्रसन्न सोनकर ने कहा कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परिवहन गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है और सभी संयंत्र प्रमुखों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कई बार ठेकेदार परिवहन लागत बचाने के लिए मनमानी करते हैं, जिसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।














