छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने उठाए पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों से जुड़े सवाल
रायपुर। हसदेव-अरण्य क्षेत्र में तारा (रिवाइज्ड) कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर विरोध तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन (CBA) और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने नीलामी की कड़ी आलोचना करते हुए इसके आवंटन को तत्काल रद्द करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यह फैसला क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, वन आधारित आजीविका और स्थानीय आदिवासी समुदायों के अधिकारों की अनदेखी करता है।
आंदोलनकारियों के अनुसार हसदेव-अरण्य छत्तीसगढ़ के घने और जैव विविधता से समृद्ध वन क्षेत्रों में शामिल है। यह हाथियों के महत्वपूर्ण आवास क्षेत्र के साथ लेमरू एलीफेंट रिजर्व के व्यापक परिदृश्य का हिस्सा है। जंगल स्थानीय आदिवासी और अन्य वन-निर्भर समुदायों की आजीविका, संस्कृति और सामाजिक जीवन से सीधे जुड़े हैं।
WII की रिपोर्ट का हवाला, हाथियों के आवास पर चिंता
संगठनों ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के जैव विविधता आकलन का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्र में खनन और उससे जुड़ा बुनियादी ढांचा हाथियों के आवास को और खंडित कर सकता है। इससे मानव-हाथी संघर्ष बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि WII ने मौजूदा खदान क्षेत्र से आगे हसदेव-अरण्य के हिस्सों को खनन के लिए ‘नो-गो’ क्षेत्र के तौर पर विचार करने की सिफारिश की थी। ऐसे में उनका सवाल है कि वैज्ञानिक चिंताओं के बावजूद नए कोयला ब्लॉक की नीलामी की जरूरत क्यों पड़ी।
2022 में विधानसभा में पारित हुआ था सर्वसम्मत प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के मुताबिक, 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव-अरण्य में कोयला ब्लॉकों को रद्द करने और जंगलों को खनन से बचाने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। संगठन का कहना है कि इस प्रस्ताव को सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिला था।
आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने हसदेव के कोयला ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने का विरोध किया था। उनके अनुसार, केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में तारा ब्लॉक को पहले भी नीलामी के लिए रखे जाने और बाद में छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सूची से हटाए जाने का उल्लेख है।
संगठन ने जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर हलफनामे का भी हवाला दिया। इसमें कथित तौर पर कहा गया था कि हसदेव-अरण्य में नए खनन रिजर्व क्षेत्रों के आवंटन या उपयोग की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले से संचालित PEKB खदान में उपलब्ध कोयला पर्याप्त है।
15 वर्षों से चल रहा है खनन विस्तार का विरोध
आंदोलनकारियों का कहना है कि हसदेव क्षेत्र के ग्रामीण और आदिवासी समुदाय करीब 15 वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से खनन विस्तार का विरोध कर रहे हैं। ग्राम सभाओं के प्रस्ताव, पदयात्राएं, धरने और जनअभियान इस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं।
अक्टूबर 2021 में हसदेव क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने करीब 300 किलोमीटर की पदयात्रा कर रायपुर पहुंचकर अपनी मांगें उठाई थीं। संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि जंगल, आजीविका और सामुदायिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को लेकर भी सवाल
तारा (रिवाइज्ड) कोल ब्लॉक की सफल बोली लगाने वाली CG Syn-Gas & Chemicals Ltd. को लेकर भी संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि यह कंपनी Mundra Synenergy Ltd. की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और Mundra Synenergy आगे Adani Enterprises Ltd. की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
संगठनों ने कहा कि अडानी समूह पहले से ही PEKB खदान के संचालन के जरिए हसदेव क्षेत्र की खनन गतिविधियों से जुड़ा है। ऐसे में पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय समुदायों के लंबे विरोध के बावजूद एक और कोयला ब्लॉक दिए जाने पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पांच प्रमुख मांगें रखीं
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें तारा (रिवाइज्ड) कोल ब्लॉक की नीलामी और आवंटन तत्काल रद्द करना, हसदेव-अरण्य में नए खनन विस्तार पर रोक लगाना और 26 जुलाई 2022 के विधानसभा प्रस्ताव को लागू करना शामिल है।
इसके अलावा संगठनों ने WII की वैज्ञानिक सिफारिशों का पालन करने तथा ग्राम सभाओं के निर्णयों और आदिवासी एवं वन-निर्भर समुदायों के संवैधानिक व कानूनी अधिकारों का सम्मान करने की मांग की है।
आंदोलनकारी संगठनों ने प्रदेश की जनता, राजनीतिक दलों, पर्यावरण संगठनों और लोकतांत्रिक समूहों से हसदेव के लोगों के समर्थन में खड़े होने की अपील की है। उनका कहना है कि हसदेव में अब और खनन नहीं, बल्कि जंगल और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।














